सात स्वर्ण जीतने वाले डिसूजा की ओलंपिक के ‘विजेता पोडियम’ तक पहुंचने की तमन्ना

 सात स्वर्ण जीतने वाले डिसूजा की ओलंपिक के ‘विजेता पोडियम’ तक पहुंचने की तमन्ना

रांची, 21 नवंबर:सीएमसीः पैंसठवीं राश्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिता में सर्वाधिक सात स्वर्ण और एक रजत पदक जीत कर सबको हैरत में डाल देने वाले कर्नाटक के 19 वर्शीय अरुण अग्नेल डिसूजा की तमन्ना है कि वह तैराकी का ओलंपिक पदक जीत कर देष का नाम रोषन करें।

  रांची में रविवार को संपन्न हुई पैंसठवीं राश्ट्रीय प्रतियोगिता में डिसूजा ने सर्वाधिक सात स्वर्ण और एक रजत पदक जीत कर सबको चांैका दिया था।

  डिसूजा ने क्लीन मीडिया को आज बताया कि मैं लगातार प्रषिक्षण के सहारे 200 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी में अपना समय कर कर रिकार्ड सुधार रहा हूं और वर्तमान में इस प्रतियोगिता का उनका सर्वश्रेश्ठ समय 1ः51.38 मिनट है जो उन्होंने यहां राश्ट्रीय प्रतियोगिता में निकाला।

  उन्होंने बताया कि उनका यह समय लंदन ओलंपिक की 200 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी प्रतियोगिता में षामिल होने के लिए तय अर्हता समय 1ः51ः59 मिनट से लगभग चैथाई सेकेंड कम है और उन्हें विष्वास है कि वह इस प्रदर्षन को दोहरा कर अगले वर्श होने जा रहे लंदन ओलंपिक में अवष्य भाग लेंगे।

   उन्होंने बताया कि लंदन ओलंपिक के लिए निर्धारित अधिकतम समय को उन्होंने यहां दूसरी बार लांघा। इससे पूर्व उन्होंने पहली बार इंडोनेषिया में हुई तैराकी प्रतियोगिता में 1ः51.58 सेकेंड का समय निकाल कर लंदन ओलंपिक के लिए तय अर्हता को पार किया था।

  डिसूजा ने कहा, ‘‘मेरी तमन्ना है कि लंदन ओलंपिक खेलों में मैं कम से कम अंतिम सोलह:सेमीफाइनलः तक पहुंचूं जिससे देष का तैराकी प्रतियोगिताओं में सेमीफाइनल तक भी न पहुंच सकने का वनवास टूटे।’’

  उन्होंने कहा कि इसके बाद अगले ओलंपिक में वह हर हाल में विजेता के पोडियम तक पहुंचने की हसरत पूरी करना चाहते हैं जिससे देष का गौरव बढ़ा सकें।

  बंगलोर विष्वविद्यालय से बायोटेक्नाॅलाजी के छात्र डिसूजा ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वास्तव में जब क्रिकेट की तुलना में भारत में तैराकी को कोई महत्व नहीं दिया जाता है तो उन्हें भारी दुख होता है लेकिन उन्होंने विष्वास जताया  िकवह दिन दूर नहीं है जब तैराकी जैसे खेलों में षामिल होने वाले और उन्हें देखने और सराहने वालों की संख्या देष में बहुत अधिक होगी।

  डिसूजा ने कहा, ‘‘भारत में पिछले चार -पांच वर्शों में और विषेश कर बीजिंग ओलंपिक खेलों के समय से तैराकी में बहुत प्रगति हुई है और इसी का परिणाम था कि पिछले वर्श दिल्ली में हुए राश्ट्रमंडल खेलों में देष का प्रदर्षन तैराकी में अच्छा था।

   उन्होंने कहा कि देष में तैराकी के क्षेत्र में ऐसी प्रतिभाएं आज सामने आयी हैं जिनका भविश्य बहुत ही उज्ज्वल दिखता है और आने वाले आठ से दस वर्श के भीतर भारत में तैराकी प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक और अन्य पदक जीतने वालों की बड़ी संख्या होगी।

  डिसूजा ने यहां 65वीं राश्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिताओं में तीन स्पर्धाओं में राश्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित कर स्वर्ण पदक जीते। इनमें सौ मीटर फ्रीस्टाइल, दो सौ मीटर फ्रीस्टाइल और पचास मीटर बैकस्ट्रोक प्रतियोगिताएं षामिल थीं।

   इनके अलावा उन्होंने दो सौ बटरफ्लाई और सौ मीटर बटरफ्लाई प्रतियोगिताओं में भी स्वर्ण पदक जीते।

  इन पांच व्यक्तिगत स्वर्ण पदकों के अलावा डिसूजा ने चार गुणा सौ मीटर फ्रीस्टाइल रिले और चार गुणा दो सौ मीटर फ्रीस्टाइल रिले प्रतियोगिताओं में भी कर्नाटक टीम के अन्य खिलाड़ियों के साथ मिलकर स्वर्ण पदक जीते।

  सिर्फ चार गुणा सौ मीटर मेडले रिले में उनकी टीम को रजत पदक से संतोश करना पड़ा था।