पितृत्व जांच में दोशी पाये जाने पर राजनीति से सन्यास ले लूंगा-कृशि मंत्री

 पितृत्व जांच में दोशी पाये जाने पर राजनीति से सन्यास ले लूंगा-कृशि मंत्री

एक महिला अध्यापिका के आरोपों से घिरे झारखंड के कृशि मंत्री सत्यानंद झा बाटुल ने आज यहां कहा कि राजनीतिक साजिष के तहत उनके विरोधी उन पर झूठे आरोप लगवा रहे हैं और दावा किया कि डीएनए परीक्षण समेत पितृत्व की किसी भी प्रकार की जांच से वह गुजरने को तैयार हैं जिससे यह साबित हो जाये कि महिला अध्यापिका के आरोप सरासर झूठे हैं।

झारखंड के कृशि मंत्री सत्यानंद झा बाटुल ने आज यहां ‘क्लीन मीडिया’ से विषेश बातचीत में कहा कि यदि प्राइमरी षिक्षिका सोनी देवी चैधरी अपने उन आरोपों को साबित कर दें जिनमें उन्होंने उन्हें अपना पति बताया है और अपने बेटे का पिता बताया है, तो वह न सिर्फ मंत्री पद से त्यागपत्र दे देंगे बल्कि राजनीति से ही सन्यास ले लेंगे।

 झा ने कहा कि वह महिला के आरोपों को फर्जी साबित करने के लिए पितृत्व की जांच के लिए डीएनए परीक्षण समेत कोई भी जांच करवाने को तैयार हैं जिससे दूध का दूध पानी का पानी हो जाये।

  उन्होंने आरोप लगाया कि सोनी देवी नामक इस महिला अध्यापिका का उपयोग उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी उन्हें नीचा दिखाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक राजनीतिक शड्यंत्र के तहत ही उनके प्रतिद्वंद्वी झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक विधायक और भाजपा के कुछ नेता इस तरह उनका चरित्र हनन करने का प्रयास कर रहे हैं।

ज्ञातव्य है कि झारखंड में दुमका जिले के जामताड़ा की रहने वाली प्राइमरी षिक्षिका सोनी देवी चैधरी ने कुछ दिनों पूर्व राज्य के कृशि मंत्री एवं भाजपा विधायक सत्यानंद झा बाटुल पर अपना पति होने और अपने बेटे का पिता होने का आरोप लगाकर यहां की राजनीति में भूचाल ला दिया था।

सोनी देवी ने सिर्फ यही आरोप नहीं लगाये कि उसका बेटा वास्तव में मंत्री का पुत्र है बल्कि उसने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री सत्यानंद झा बाटुल ने 1996 में उससे मंदिर में विधिवत विवाह किया था। यह अलग बात है कि वह स्वयं स्वीकार करती है कि 1993 में उसका विवाह भूपेन चैधरी नामक व्यक्ति से हुआ था जिससे उसका तलाक या अलगाव अब तक नहीं हुआ है।

  इस संबन्ध में पूछे जाने पर सोनी देवी ने कहा कि वह भाजपा की कार्यकर्तृ रही है और मंत्री बाटुल के संपर्क में पिछले लगभग बीस वर्शों से है।

  उसने दावा किया कि मंत्री जी से संपर्क प्रगाढ़ होने पर 1996 में अपने गृह जिले दुमका में उसने एक मंदिर में उनके साथ विवाह कर लिया।

  यह पूछे जाने पर कि इसका उसके पास क्या प्रमाण है, सोनी देवी दावा करती है कि उसका प्रमाण उसका आठ वर्श का बेटा है जो मंत्री से ही पैदा हुआ है।

 यह पूछे जाने पर कि उसके पास क्या प्रमाण है कि उसका  बेटा मंत्री का पुत्र है सोनी ने कहा कि इसके लिए मंत्री का डीएनए परीक्षण कराना होगा।

  पूरे प्रकरण पर सफाई देते हुए मंत्री सत्यानंद झा बाटुल ने कहा कि सोनी देवी के सारे आरोप बेबुनियाद और शड्यंत्र के तहत लगाये गये हैं।

  उन्होंने कहा कि वह दावा करती है कि 1996 में उसके साथ उन्होंने विवाह किया था लेकिन यह कैसे संभव है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं विवाहित हैं और अध्यापिका सोनी भी विवाहित है। सोनी का अपने पहले पति भूपेन चैधरी से तलाक नहीं है। ऐसे में हिंदू विवाह अधिनियम के तहत ऐसा कोई विवाह संभव ही नहीं है।

 उन्होंने कहा कि वह सोनी को भाजपा कार्यकर्तृ के रूप में जानते हैं लेकिन उसके सारे दावे पूरी तरह गलत हैं।

 बाटुल ने कहा कि यदि सोनी उनके साथ विवाह का कोई प्रमाण दे दे अथवा वह अपने इस दावे को साबित कर दे कि उसके बेटे के पिता वह हैं तो वह न सिर्फ मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे देंगे बल्कि राजनीति से सन्यास ले लेंगे।

  इस मामले में मंत्री के प्रतिद्वंद्वी जामताड़ा के झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक विश्णु भैया ने इस मामले में मंत्री को बर्खास्त किये जाने की मांग की और कहा कि सोनी को न्याय मिलना चाहिए। 

  राजनीतिक गलियारों में ऐसा माना जा रहा है  िकइस पूरे प्रसंग के पीछे उक्त झामुमो विधायक का ही हाथ है और उन्हीं की षह पर अध्यापिका ने मंत्री पर यह आरोप लगाये हैं।

 इस संबन्ध में पूछे जाने पर मंत्री झा ने कहा  िकवह किसी का नाम नहीं लेंगे लेकिन उनके प्रतिद्वंद्वी जानबूझ कर उनके चरित्र का हनन करने का प्रयास कर रहे हैं और उनकी पार्टी के भी कुछ षीर्श नेता इसमें सहभागी हैं। इसके पीछे उनका मकसद उनका मंत्रि पद छीनकर अपने चहेतों को मंत्री बनाना है।

  उन्होंने कहा कि आरोप लगाने वाली महिला सोनी देवी ने अपने ही गांव के व्यक्ति दुलाल राय पर 12 जनवरी, 1997 को भी इसी तरह यौन षोशण का आरोप लगाया था जिसके आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर दुलाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में महिला ने अदालत में अपनी गवाही में कहा, ‘‘अपना केस सिद्ध करने के लिए झूठे आरोप तो लगाने ही पड़ते हैं’’, और अपने आरोप वापस ले लिये थे। लेकिन इस सद्मे से कथित आरोपी दुलाल की मृत्यु हो गयी थी।

 मंत्री ने कागजात दिखाते हुए कहा कि इस महिला के 1996 और 2007 के मतदाता पहचान पत्र में उसके पति का नाम स्पश्ट तौर पर भूपेन चैधरी लिखा हुआ है। इतना ही नहीं राषन कार्ड, विद्यालय के रजिस्टर आदि में भी उसके पति का नाम दर्ज है ऐसे में उसके फर्जी आरोपों को जानबूझ कर उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और कुछ स्वार्थ प्रेरित मीडिया के लोग हवा दे रहे हैं।

 मंत्री ने दावा किया कि महिला के बच्चे का जन्म जिस अस्पताल मे ंहुआ है वहां उसके जन्म प्रमाण पत्र में भी पिता का नाम भूपेन चैधरी का ही दर्ज है।

उन्होंने बताया कि सोनी ने पिछले वर्श भी उनके खिलाफ इस तरह के आरोप लगाये थे लेकिन लेकिन फिर एक सप्ताह बाद उसने अपने आरोप वापस ले लिये।

  इस बार फिर इस तरह के अनर्गल आरोप लगाये जाने से वह बेहद दुखी और पीड़ित हैं जिसके चलते उनके पुत्र ने महिला के खिलाफ मानहानि और फर्जीवाड़े का मुकदमा जामताड़ा के न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष लगाया है।

  उन्होंने कहा कि यदि महिला के दावे में कोई भी सच्चाई है तो आखिर वह आज तक अदालत क्यों नहीं गयी। उन्होंने कहा कि यदि अदालत निर्देष देता है तो उन्हें अपना डीएनए परीक्षण करवाने में कोई परहेज नहीं है।

 पूरे मामले में राज्य में भाजपा की किरकिरी के संबन्ध में पूछे जाने पर झारखंड के भाजपा प्रभारी हरेन्द्र प्रतात ने दो टूक कहा कि महिला के आरोप प्रथम दृश्ट्या ही फर्जी प्रतीत होते हैं। उसके आरोपों में राजनीतिक शड्यंत्र की बू आती है।

  उन्होंने कहा कि पहले तो मामले के सामने आने पर स्वयं उन्होंने मंत्री को इस्तीफा देकर अपने को निर्दोश साबित करने को कहा था लेकिन सारे दस्तावेज और मामले की विस्तृत जानकारी के बाद उन्हें यह कथमपि उचित नहीं लगा।

 हरेन्द्र प्रताप ने कहा कि भाजपा और सरकार पूरी तरह अपने मंत्री सत्यानंद झा बाटुल के साथ है क्योंकि महिला के आरोपों के पीछ शड्यंत्र की बात यहां के एक इलेक्ट्रानिक चैनेल ने भी स्टिंग आपरेषन कर साबित कर दिया है।

  इस संबन्ध में विधानसभाध्यक्ष सीपी सिंह ने कहा कि आखिर महिला यदि बीस वर्शों से पीड़ित है तो अब क्यों जागी है। उसने इस बात की षिकायत झा के मंत्री बनने के बाद वह भी अब क्यों की।

  उन्होंने यह भी सवाल किया कि यदि महिला के आरोपों में दम है तो वह कांग्रेस नेता एन डी तिवारी के प्रकरण की तरह अदालत अबतक क्यों नहीं गयी।

  उन्होंने कहा कि उल्टे इस मामले में तो मंत्री ही अदालत गये हैं। महिला तो अबतक अदालत नहीं गयी है। उन्होंने कहा कि किसी पर इस तरह के झूठे आरोप लगाना बहुत आसान होता है।