बुद्धिजीवी वर्ग और युवा भी उत्तर प्रदेष विधानसभा चुनावों मंे सक्रिय हुआ

  विष्वभर में अपने मिलनसार स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले जलीय प्राणी  डाल्फिन की तादाद लगातार कम होती जा रही है। एक ओर जहा! यह दुर्लभ प्राणी  की श्रेणी मे! खङी है वही!  नदियो! से लगातार इनका गायब होना इनके अस्तित्व पर स!कट पैदा कर रहा है। आकङो!  के अनुसार पुरे देष मे! इनकी स!ख्या  2000 के आस पास है। वही! बिहार मे! लगभग 1200 डाल्फिन है। पर इस स्तनधारी जीव की कम होती स!ख्या का स!कट बिहार मे! भी देखने को मिल रहा है।

           डाल्फिन के षरीर मे! एक विषेश प्रकार का तेल पाया जाता है।इसके ग!ध से दुसरी मछलिया! इनकी ओर  ख्!िाची चली आती है।इसी का फायदा मछुआरे उठाते है और उस तेल को अपने जाल मे! लगाने के लिए  डाल्फिनो! का षिकार करते है!। इसके अलावे लगातार प्रदूशित हो रही ग!गा भी इनकी मौत का सबब बन चुकी है। 

            परिणामतः जहा! कुछ साल पहले तक पटना मे!  गायघाट से लेकर कलेक्टेरियेट घाट तक करीब 200 डाल्फिने! ग!गा मे! अठखेलिया! किया करती थी वही! अब इनकी स!ख्या घट कर मात्र 25 से 30 हो गयी है। हाला!कि इनकी सुरक्षा के लिए भारतीय वन्य जीव स!रक्षण नीति 1972 के तहत् डाल्फिनो! का षिकार करने वालो! या उसके षरीर का कोई भी अ!ग रखने वालो! को 1 से 6 साल की कैद और 6000 रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है,वही! वर्ष 1991 मे! सरकार ने बिहार को गै!गेटिक रिवर डाल्फिन स!रक्षित क्षेत्र भी घोशित किया है!,पर!तु फिर भी प्रकृति के इस अहि!सक प्राणी की हि!सा हो रही है।

          यह दुर्भाग्य ही है कि नियमो! की   अनदेखी इनके जान पर बन आई है। जिनसे नदियो! की सु!दरता बढती थी जो पर्यटको! को अपनी ओर आकर्शित करती थी आज वह मछुआरो! के जाल के अ!दर तडप तडप कर अपनी रिहाई मा!ग रही है।

        अगर हमने इन्हे! बचाने की पहल नही! की तो वह दिन दूर नही! जब यह जीव भी विलुप्त होकर किताबो! के पन्नो! मे सिमट जायेगा और फिर हम इसे नदियो! मे!  ऊपर से नीचे छला!ग लगाते कभी नही देख पाए!गे।    

बुद्धिजीवी वर्ग और युवा भी उत्तर प्रदेष विधानसभा चुनावों मंे सक्रिय हुआ

वाराणसी, 14 फरवरी:सीएमसीः उत्तर प्रदेष में हो रहे विधानसभा चुनावों में इस बार बुद्धिजीवी वर्ग भी बेहद सक्रिय है और वह प्रदेष में ईमानदार सरकार स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।

उत्तर प्रदेष में तीसरे चरण के मतदान में वाराणसी की आठ विधानसभा सीटों पर भी मत डाले जायेंगे। ‘क्लीन मीडिया टुडे पोर्टल’ की टीम ने वाराणसी के बुद्धिजीवी वर्ग और विषेशकर पत्रकारिता षिक्षण से जुड़े लोगों से की गयी बातचीत मंे यह पाया कि मतदान प्रतिषत में बढ़ोत्तरी होगी और युवाओं की भागीदारी पिछले चुनाव की अपेक्षा इन चुनावांे में स्पश्ट रूप से अधिक देखने को मिलेगी।

षिक्षित वर्ग भी इस बार के मतदान के लिए स्वयं जागरूक दिखाई दे रहा है और इस वर्ग के लोगों को काम करने वाली सरकार एवं ईमानदार नेतृत्व की दरकार है।

काषी विधापीठ के मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर राममोहन पाठक ने क्लीन मीडिया से कहा कि पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में इस विधानसभा चुनाव में वोट प्रतिषत कम से कम पचास प्रतिषत बढ़ना चाहिए और पिछले वर्श के चालीस प्रतिषत मतदान को बढ़ कर इस बार साठ प्रतिषत हो जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि चुनाव की तारीख आने के बाद कई सारे लोगों ने चैदह और पन्द्रह फरवरी के अपने रेलवे के टिकट भी वापस किये हैं जो इस बार मतदाता के जागरूकता को स्पश्ट करता है।

उन्होंने कहा कि बड़ी बात यह है कि विद्यार्थी षिक्षकों को मतदान के लिए जागरूक कर रहे हैं और षिक्षक विद्यार्थियांे को, ऐसा माहौल कभी कभी बनता है जिसको देख कर लगता है कि बनारस इस बार मतदान प्रतिषत के पिछले रिकार्डों को ध्वस्त कर देगा। गुरु-षिश्य परम्परा के इस देष में कई सारे गुरू और षिश्य चुनाव मैदान में आमने-सामने भी हैं पर षिक्षा जगत में गुरू और षिश्य एक दूसरे को मतदान के लिए प्रेरित करते हैं।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने पत्रकारिता में पेड न्यूज सिस्टम को कम करने के लिए एक अभियान चलाया है जिसके कारण पेड न्यूज के सिस्टम पर चालीस से पचास प्रतिषत तक लगाम लगती दिखायी देती है। कुछ अखबारों और न्यूज चैनल को नीचे से पैकेज दिये गये हैं जो खबरों की अस्पश्टता से खुद ब खुद बयान हो जाती है। परन्तु इससे साफ सुथरा चुनाव होता भी दिख रहा है और कहीं न कहीं यह कहा जा सकता है कि चुनाव के पहले मीडिया जगत पर इस तरह की बन्दिष जरूरी भी थी।

उन्होंने कहा कि बिरादरी के नाम पर इस बार वोट पड़ने वाले हैं।

काषी हिन्दू विष्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर अनुराग दवे ने क्लीन मीडिया की टीम से बातचीत में कहा कि एनजीओ और मीडिया के प्रयास से समाज में मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ी है जिसके कारण इस बार मतदान प्रतिषत कम से कम पचपन प्रतिषत तक चले जाना चाहिए। अभी तक हुए चुनाव को देखने से लगता है कि युवाओं में वोट देने के प्रति जागरूकता आयी है और यह स्पश्ट दिख रहा है कि जाति और क्षेत्रीय बंधनों को छोड़ के लोग अपने भविश्य को देख रहे हंै जिसका परिणाम हमंे एक साफ सुथरी सरकार के रूप में मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि पहले के चुनावों में बीएचयू में वोट प्रतिषत कम रहा है पर इस बार के माहौल को देख कर लगता है कि बीएचयू में मतदान प्रतिषत बढ़ेगा। इस बार के चुनावों में मतदाता ईमानदार और साफ छवि वाला प्रत्याषी चाहता था परन्तु कुछ जगहों पर ऐसा प्रत्याषी न मिलने के कारण लोगांे के मन में टीस है। चुनाव आयोग ने ठीक कदम उठाये हैं जिसका परिणाम हमें वोट गिनती वाले दिन दिखायी देेगा।

बीएचयू के ही राजनीति षास्त्र विभाग के प्रोफेसर आर पी सिंह ने क्लीन मीडिया से कहा कि वोट प्रतिषत बीएचयू में सदैव कम रहा है परन्तु इसका कारण जागरूकता नहीं बल्कि चुनाव आयोग के द्वारा बनायी जाने वाली पर्चियों में नाम और बूथ स्थान में तब्दीली है। 

उन्होंने कहा कि उनका और उनके परिवार का नाम बीएचयू से डेढ़ किलोमीटर दूर संकटमोचन बूथ पर हो गया है जबकि उनका परिवार बीएचयू से सटे नरिया में रहता है। उन्होंने दावा किया कि वोट प्रतिषत गिरने में मतदाता सूची ही पूरा खेल करती है। चुनाव आयोग के अधिकारियों से षिकायत करो तो वो नया फार्म भरवाते हंै और फिर आधा किलोमीटर से डेढ़ किलोमीटर दूर बूथ स्थान बनाने का काम करते हैं।

उन्होंने कहा कि वोट प्रतिषत इस चरण में सत्तर या पचहत्तर प्रतिषत जाता पर चुनाव आयोग के मतदाता सूची की गड़बड़ी के कारण लगता है कि यह सिर्फ पचास प्रतिषत तक ही जायेगा।

काषी विधापीठ के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल उपाध्याय ने क्लीन मीडिया से कहा कि चुनाव संहिता लग जाने के कारण मीडिया बंधन में दिखायी दे रही है नहीं तो हर वर्श पेड न्यूज हर पेज और प्रत्येक चैनल में दिखायी देता था। चुनाव आयोग ने साठ प्रतिषत के करीब पेड न्यूज पर बंधन लगाया है। उत्तर भारत में षिक्षित वर्ग कुछ कम है जिसके कारण क्षेत्रिय दल हावी हंै लेकिन इस बार युवाओं में जोष दिख रहा है जिसका परिणाम अच्छा ही आयेगा।

उन्होंने कहा कि पत्रकार एक ‘मास षिक्षक’ है और विधार्थी पत्रकारिता को पवित्र पेषा समझते हैं। आज का पत्रकारिता का विद्यार्थी ही कल का एक साफ सुथरा पत्रकार बनेगा और जो किसी भी चुनाव को स्पश्ट और ईमानदार नजरिये से देखेगा। चुनाव में माफिया चुनाव लड़ते हैं और जनता उन्हें वोट देती है इसके प्रति जनता को पत्रकारों को जागरूक करना चाहिए और लोगों को बताना चाहिए कि वह माफियाओं को वोट न दंे।

उन्होंने कहा कि राज्य में चुनावी दंगल में फिलहाल किसी को स्पश्ट बहुमत मिलता नहीं दिखायी दे रहा है और इसी कारण किसी को डेढ़ सौ सीट तो किसी को सौ और किसी दल को सौ से भी कम सीट मिलेगी।

वाराणसी के और भी प्रबुद्ध वर्ग से क्लीन मीडिया ने बातचीत की जिसमें यह स्पश्ट होता दिखाई दे रहा है कि कहीं न कहीं चुनाव आयोग की सख्ती के कारण जनता प्रसन्न है और वोट डालने के लिए जागरूक है। युवा और षिक्षित वर्ग मतदान के लिए तैयार है जिसके परिणाम स्वरूप इस चरण में मतदान प्रतिषत बढ़ेगा। चुनाव में मुद्दे कई दिखाई पड़ रहे हैं पर भ्रश्टाचार के विरूद्ध जनता की लड़ाई मुख्य रूप से लामबंद है। अब वक्त ही बतायेगा कि जनता उत्तर प्रदेष में अपना मत किस ओर डालती है।