बाजार तंत्र की मजबूती के लिए व्यावसायिक अदालतों का सुझाव

 बाजार तंत्र की मजबूती के लिए व्यावसायिक अदालतों का सुझाव

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश राजेन्द्र बाबू ने देश में विशेष व्यावसायिक अदालते स्थापित करने का सुझाव दिया है ताकि बाजार तंत्र के लिए न्यायिक ढांचा मजबूत बनाया जा सके।

न्यायमूर्ति राजेंद्र बाबू ने कहा कि आज शनिवार के व्यावसायिक सौदों के लिए समय पर फैसला बहुत जरूरी है। हमारा लक्ष्य हो कि न्याय में शीघ्रता हो पर शीघ्रता का मतलब जल्दबाजी नहीं हो।

वह आज यहां उच्च आर्थिक वृद्धि के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए न्याय व्यवस्था को नया रूप देने के विषय में एक राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन कर रहे थे।

इसका आयोजन फिक्की और बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने मिलकर किया था। दिवालिया इकाइयों, श्रम विवाद, कर और अन्य व्यावसायिक मसलों के लिए विशिष्ट अदालतों की स्थापना की जानी चाहिए। इससे बाजार तंत्र के सुसंचालन के लिए जरूरी कानूनी ढांचा मजबूत होगा।

न्यायमूर्ति राजेन्द्र बाबू ने कहा कि एक विशिष्ट अदालत में एक न्यायाधीश स्पष्ट नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार विशेष प्रकार के मामलों को ही देखेगा तो मामले का निपटारा तेजी से होगा। इन अदालतों में विशिष्ट क्षेत्र के विशेषज्ञ न्यायाधीश होंगे।

उन्हें अपने निर्णय पर सामान्य अदालतों में अपील की अनुमति देने या न देने का अधिकार हो सकता है। न्यायाधीशों की विशेषज्ञता से निर्णयों की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।

उन्होंने बाजार व्यवस्था की मजबूती के लिए न्यायिक प्रणाली की मजबूती को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अफ्रीका और लातीनी अमेरिका के कई देशों की कई अर्थव्यवस्थाएं कानूनी प्रणाली की कमजोरी के कारण ध्वस्त हुई हैं।

फिक्की के अध्यक्ष वाई. के. मोदी ने कहा कि भारत में व्यवसाय और कर से संबंधित कानून अब भी बहुत उलझे हुए हैं। इनको सरल बनाने की जरुरत है।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एफ. एस.नरीमन ने कहा कि यह धारणा गलत है कि केवल न्यायाधीश की संख्या बढ़ा देने से निर्णयों में तेजी आ जाएगी। उनकी राय में तेजी तभी आएगी जब खासकर उच्चतम न्यायालयों में ऐसे न्यायाधीश नियुक्त हों जिन्हें खुद वकालत का भी अच्छा अनुभव हो।

राजग के गुडफील घोषणा पत्र से शेयरों में सुधार

अमेरिका-जापान आदि से मजबूती के समाचार मिलने और सत्तारूढ़ राजग द्वारा गुड फील आर्थिक प्रस्ताव वाले घोषणा-पत्र से गत चार दिन के कारोबार में शेयर बाजारों में और सुधार नजर आया।

शक्रवार को गुड-फ्राइडे के उपलक्ष्य में शेयर बाजार बंद रहे और शनिवार-रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहता है। स्थानीय बीएसई इंडेक्स लगातार तीसरे सप्ताह स्वास्थ्य लाभ करते हुए पिछले सप्ताह 5708.88 से बढ़ता हुआ 5838.45 हो गया।

स्थानीय एनएसई इंडेक्स भी 1841.10 से तरक्की करता हुआ 1853.55 पर जा पहुंचा। गत वर्ष इन्हीं दिनों दोनों इंडेक्स क्रमश: 3141.75 और 1004.85 थे। यह भी गौरतलब है कि बीएसई इंडेक्स गत 22 मार्च को वर्ष के नीचे स्तर 5365.40 पर आ गया था।

शेयर बाजार में विदेशी वित्तीय संस्थाओं का शुद्ध निवेश गत सप्ताह 800/900 करोड़ रुपए और बढ़ गया। मार्च तक तीन माह में लगभग 13 हजार करोड़ रुपए ज्यादा निवेश हुआ। वैसे गत दिसम्बर तक 9 माह में देश में विदेशी निवेश 26.4 अरब डॉलर बढऩे का अनुमान था।

विदेशों में बैंक ब्याज दर कम होने और सरकार की उदारवादी अर्थव्यवस्था को देखते हुए विदेशी निवेश में वृद्धि जारी रहेगी। उल्लेखनीय है कि राजग के घोषणा पत्र मेें सत्ता के लिए उदारवादी अर्थव्यवस्था की घोषणाओं का पिटारा एक बार फिर खोल दिया गया।

इससे पहले गत जनवरी में केन्द्रीय वित्त एवं अन्य मंत्रियों ने विदेश व्यापारियों, उत्पादकों, व्यापारियों, किसानों, नौकरी पेशा वर्ग आदि सभी को 25/30 हजार करोड़ रुपए की करों में रियायतों के जरिये गुड फील कराया था।

चूंकि वित्त वाणिज्य आदि महत्वपूर्ण मंत्रालय वाजपेयी जी की पार्टी के पास है इसलिए राजग के घोषणापत्र के जरिये उद्योग व्यापार को और हर्षित करने के लिए वैटकर अपनाऊ राज्यों को रियायतें, 2006 तक राज्यों की घाटा मुक्ति पांच वर्ष में जीडीपी 8-10 प्रतिशत, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए अलग से मंत्रालय, पिछड़े क्षेत्रों में रोजगार देने वाली प्राइवेट कम्पनियों को रियायतें, एसएसई हेतु एक हजार करोड़ रुपए का आधारभूत और दस हजार करोड़ रुपए का मंडी विकासकोष आदि के डोज दिये गये।

इनके लिए फंड कहीं टेक्स लगाकर न जुटाया जाये इसलिए यह डर निकालने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा शायद जून अंत में आने वाले केन्द्रीय बजट में तटकर घटाने के संकेत दिये गये। हालांकि प्रत्यक्ष-कर राजस्व पहली बार 1.03 लाख करोड़ रुपए प्राप्त होने के बावजूद अप्रत्यक्ष कर-राजस्व डेढ़ लाख करोड़ रुपए की उम्मीद से तीन हजार करोड़ रुपए पिछडऩे के आसार है तथापि वित्त मंत्रालय सूत्र अप्रत्यक्ष कर विभाग के अधिकारों पर भी अंकुश लगाने के संकेत देते हैं।

मार्केट वालों के विचार में जैसे अर्जुन को मछली की आंख दिखती थी। सत्तारूढ़ नेता कुर्सी को निशाने पर रखते हुए रियायतों का मनचाहा पिटारा खोले बैठे हैं। राजग घोषणा पत्र का फिक्की ने हार्दिक स्वागत किया है। गत सप्ताह बीएसई में इन्फोसिस टेक बोनस मिलने की आशा में 5107.10 से बढक़र 5312.70 रुपए हो गई।

गत 18 मार्च के दिन यह 4924.90 रुपए थी। उस समय 429.70 रुपए वाली मारुति के शेयर गत सप्ताह शुरू में 544.20 रुपए होने के बाद 535.45 रुपए हो गये। गत सप्ताह विप्रो 1464.90 रुपए पर 69.50 और रेनबक्सी लेब 1043.55 रुपए पर 52.90 रुपए बढ़ गई थी। सेबी ने उन कम्पनियों को अपने शेयर डिलिस्ट करने से रोक दिया जिन्होंने पुन: खरीद का सहारा लिया।

गत सप्ताह कोलकाता शेयर सूचकांक 3433.17 से बढक़र 3437.79 व एमएसई 4233.03 सुधरकर 4243.43 हो गया। अंतरराष्टï्रीय मार्केट में नास्डाक न्यूयॉर्क 2043.58 से सुधरकर भारतीय तिथिनुसार 2061.59 हो गया।

वॉलस्ट्रीट न्यूयार्क इंडेक्स 10449.48 की बजाय 10493.42 बताया गया। सप्ताहांत में इन शेयर बाजारों में इन्फोसिस टेक 83.7 डॉलर, विप्रो 42.83 डॉलर, डॉ. रेड्डïी 21.28 और आईसीआईसीआई में 15.96 डॉलर के भाव सौदे हुए थे।

अमेरिका में गत माह 1.30 लाख व गत 3 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में तीन हजार को रोजगार और मिलने की खबर थी। आर्थिक स्थिति सुधरने के संकेत थे, जबकि ब्याज दर अभी 46 वर्ष के नीचे स्तर एक प्रतिशत पर है।

लंदन इंडेक्स 4457.70 से बढक़र 4487.90 और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स 12731.76 से सुधरकर 12909.37 हो गया। अमेरिका की तरह जापान की आर्थिक स्थिति भी तेजी से बेहतर होने लगी। इसलिए टोक्यो का निक्की इंडेक्स 11815.95 की बजाय 12092.59 पर जा पहुंचा। गत वर्ष इन्हीं दिनों यह 8057.61 था।