कृष्णा ने कहा- चाहे जो हो, पानी नहीं देंगे

कृष्णा ने कहा- चाहे जो हो, पानी नहीं देंगे

कावेरी जल विवाद का मामला शीघ्र ही निबटता दिखाई नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को मानने से इनकार कर रहे कर्नाटक के मुख्यमंत्री एस.एम. कृष्णा ने हालांकि विरोधी दलों की मांग के आगे झुकते हुए अपनी पदयात्रा स्थगित कर दी लेकिन साथ ही फिर कहा कि चाहे जो हो वे नदी का पानी तमिलनाडु को नहीं देंगे तो तमिलनाडु भी पानी लेने पर अड़ा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तामील करवाने का आग्रह करते हुए तमिलनाडु और पांडिचेरी में आज दिन भर चला बंद शांति से गुजरा। उधर तमिल सुपरस्टार रजनीकांत ने 12 अ०टूबर को अनशन करने का एलान किया। इसी दिन तमिल फिल्म कलाकार नेवेली तक रैली निकालकर कर्नाटक को इस ताप बिजलीघर से विद्युत देने का विरोध करेंगे।

कृष्णा ने आज अपनी पदयात्रा के तीसरे दिन इसे स्थगित करने की घोषणा की। इससे पहले बताया जा रहा था कि वे अपनी 9 दिन की पदयात्रा निर्धारित कार्यक्रम से दो दिन पहले 12 अ०तूबर को अपने गृह जिले मांड्या में समाप्त कर देंगे। उल्लेखनीय है कि पदयात्रा का विपक्षी दलों द्वारा व्यापक विरोध हुआ था। कृष्णा ने आज कहा कि वे इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी करने का कोई भी नतीजा भुगतने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 54 वर्षों में किसी भी मुख्यमंत्री द्वारा लिया गया यह फैसला दु:खदाई अवश्य है लेकिन ऐसा होना लाजिमी था।

चुनाव में लगभग 800 लोग मरे

जम्मू-कश्मीर में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद से सुरक्षा बलों के साथ विभिन्न मुठभेड़ों में 370 आतंकवादी मारे गए, जबकि आतंकवादियों ने राज्य में हिंसक गतिविधियां बढ़ाते हुए 250 नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया। इस दौरान सुरक्षा बलों के 150 जवान भी शहीद हो गए। राज्य विधानसभा चुनावों के चारों चरणों में आतंकवादियों ने राज्य के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री मुश्ताक अहमद लोन, हंडवारा सीट से स्वतंत्र प्रत्याशी अ३दुल रहमान शेख और लगभग पचास राजनीतिक कार्यकर्ताओं को मौत की नींद सुला दिया। आतंकवादियों से निपटने के प्रयास में राज्य पुलिस के 27 जवान भी खेत रहे ।

पर्यवेक्षकों ने जम्मू-कश्मीर चुनाव को निष्पक्ष बताया

आतंकवाद से पीडि़त जम्मू-कश्मीर में नई विधानसभा के लिए चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र भले ही न रहे, लेकिन पूरी तरह निष्पक्ष जरूर थे। यह विचार पर्यवेक्षकों ने व्य०त किया है।

राज्य के चुनाव अध्ययन दौरे से लौटे समाज विज्ञान संस्थान के निदेशक जार्ज मैथ्यू ने कहा कि आतंकवादियों को लेकर सेना ने भय का ऐसा माहौल बनाया कि चार चरणों वाले चुनाव स्वतंत्र नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की राज्य में बहुत प्रतिष्ठा है। आयोग ने विशेष कार्रवाई दल और विशेष कार्यबल को उनकी बैरकों में भेजकर सराहनीय काम किया है।

श्री मैथ्यू के 47 सदस्यीय इस अध्ययन दल में पत्रकार, नागरिक अधिकार कार्यकर्ता, समाज विज्ञान संस्थान के सदस्य और अनुसंधानकर्ता शामिल थे। श्री मैथ्यू ने कहा कि आतंकवादियों ने चुनावों में गड़बड़ी करने की धमकी दी थी, जिसके कारण राज्य में इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई जितनी पहले कभी नहीं की गई थी। चुनाव के दूसरे चरण तक आतंकवादी हिंसा की कुल 45 घटनाएं हुईं थीं। इनमें एक राज्यमंत्री की हत्या भी शामिल है। उन्होंने कहा कि उनके दल को ऐसी शिकायतें मिलीं कि घाटी में चुनावों के दौरान सुरक्षा बलों ने लोगों को मतदान के लिए मजबूर किया। हालांकि स्वतंत्र रूप से इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी।

सोपोर कस्बे में उनके दल ने बताया कि न्यू कालोनी में उनका सामना सीमा सुरक्षा बल के बंदूकधारियों और उनकी बख्तरबंद गाडिय़ों के सामने विरोध कर रहे लोगों की बड़ी भीड़ से हुआ। श्री मैथ्यू ने कहा कि जनता ने उन्हें बताया कि 16 सितंबर को दोपहर तीन बजे सीमा सुरक्षा बलों ने एक मस्जिद से घोषणा की कि मतदान के लिए अब केवल एक घंटा रह गया है और लोगों को मतदान करना चाहिए।

यह भी बताया गया कि जब लोग मतदान करने नहीं आए तो सुरक्षा बलों ने घर- घर जाकर लोगों से बाहर निकलने को कहा। उन्होंने बताया कि कुछ महिलाओं ने अपने कंधों पर खरोंचों के निशान, पुरूषों ने जख्म और दांत से खून निकलना दिखाया। लेकिन किसी ने सुरक्षा बलों को जनता के साथ मारपीट करते देखा नहीं था इसलिए इन लोगों के बयानों का उनके अपने अलावा कोई प्रमाण नहीं है। समाचार एजेंसी यूनाइटिड न्यूज आफ इंडिया की पत्रकार रितम्भरा शास्त्री ने बताया कि उन्होंने देखा कि 16 वर्ष के एक लडक़े का पांव एक दुर्घटना में टूट जाने पर आतंकवादियों ने कैसे उसे सेना का अत्याचार बताने की कोशिश की।

राष्ट्रपति कलाम तथा प्रधानमंत्री वाजपेयी को बुधवार को राष्ट्रपति भवन में रूसी मेहमान पुतिन के लिए करीब 20 मिनट इंतजार करना पड़ा। स्वागत समारोह, सुबह 10 बजे शुरू होना था।

कुछ देर तक मेहमान के इंतजार में खड़े रहने के बाद आखिर कलाम तथा वाजपेयी को प्रोटोकॉल अधिकारियों ने बैठने का आग्रह करते हुए कुर्सियां दीं। कल रात पुतिन के पहुंचने पर पालम हवाईअड्डे पर उनकी अगुवानी के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और विदेश सचिव कंवल सि३बल भी ट्रैफिक जाम की वजह से समय पर नहीं पहुंच सके थे।

त्रिपुरा में सेना के नौ जवानों की हत्या

त्रिपुरा में धलायी जिले के रायसवरी में नेशनल लिबरेशन फ्रंट आफ त्रिपुरा के उग्रवादियों ने आज सेना के नौ जवानोंं की हत्या कर दी। हमले में तीन जवान घायल हो गए, जिन्हें असम के सिलचर अस्पताल भेजा गया है।

सूत्रों के अनुसार एनएलएफटी के उग्रवादियों ने स्वचालित हथियारों से उस समय हमला किया, जब सेंट्रल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स के जवानों को सीमा पर सडक़ निर्माण के लिए ले जाया जा रहा था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अतिरि०त सुरक्षा बलों के साथ मौके पर पहुंच चुके हैं और उग्रवादियों को पकडऩे के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है।