गुजरात चुनाव : भडक़ाऊ भाषणों से गर्माया गुजरात

 गुजरात चुनाव : भडक़ाऊ भाषणों से गर्माया गुजरात

गुजरात अचानक गर्म हो गया है। हफ्ते भर बाद होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर नहीं, वरन 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद कांड की दसवीं बरसी को लेकर।

०या भाजपा और ०या कांग्रेस, सभी के तेवर तीखे हो गए हैं और आग में घी डाला है विश्व हिंदू परिषद ने।

सोनिया गांधी के लिए कहे गए आपत्तिजनक श३दों के बाद गोधरा से अक्षरधाम तक विजय यात्रा निकालने में विफल रहने के बाद देश भर में सुर्खियां बने प्रवीण तोगडिय़ा ने अब ‘राष्ट्रीय शर्म के प्रतीक’ के विध्वंस की दसवीं ‘सालगिरह’ भी शौर्य यात्रा के रूप में मनाने की बात कह दी है।

पूरे अहमदाबाद शहर में चुप्पी छाई हुई है। जगह-जगह सीआरपीएफ के जवान चहल कदमी कर रहे हैं। ढेरों कंपनियां बाहर से बुला ली गई हैं। लोग नेताओं को शक भरी निगाहों से देख रहे हैं।

नारोल मार्ग पर एक कॉल सेंटर पर मौजूद युवाओं में ‘यात्राओं’ को लेकर रोष देखा जा सकता है, वहीं नरोड़ा में दफ्तरों से लौट रहे मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा लोग चुनावों को ही कोसते पाए जाते हैं।

उधर, आम गुजरातियों की इच्छा, उत्सुकता और आशाओं से पूरी तरह बेखबर नेता राज्य के कोने-कोने में एक-दूसरे पर कीचड़ उछालते-उछालते अब भडक़ाऊ भाषणों पर उतर आए हैं।

जहां कार्यवाहक मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ‘हिंदुत्व’ की आंधी चलाना चाहते हैं- और इसी सिलसिले में गोधरा-गोधरा दोहराते चले जाते हैं- वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शंकर सिंह वाघेला ऐसे छद्म हिंदुत्व के खिलाफ जहर उगल रहे हैं।

सारा चुनाव लोकतांत्रिक स्तर से हटकर व्य०ितगत टीका-टिप्पणी और चरित्र-हनन की ओर की ओर बढ़ता जा रहा है।

कांग्रेस को ललकारते हुए मोदी हर सभा में कहते हैं- गोधरा पर ये इसलिए कुछ नहीं बोल सकते ०योंकि उनके मुंह पर ‘इटालियन ताला’ लगा हुआ है, वहीं वाघेला मोदी को निर्दोष अल्पसंख्यंकों के ‘खून से सना’ नेता बता रहे हैं।

इन सबके बीच मतदाता हैरान सा है कि कौन से ‘गुजराती’ गौरव की बात हो रही है। गुजराती गौरव दरअसल मोदी का ही चलाया हुआ जुमला है जिसे यकायक कांग्रेस ने कल उस सममय अपना लिया जब स्थानीय नेताओं की सलाह पर सोनिया गांधी ने बनासकांठा की पहली आमसभा में हू-ब-हू इसका जिक्र किया।

कांग्रेस अध्यक्ष ने मोदी को उसी तर्ज पर धि०कारा जैसा कि वे उन्हें जब-तब ‘इटालियन सहित किसी भी भाषा में’ बहस करने के लिए ललकारते रहते हैं।

मोदी हर बात में इस्लामी आतंकवाद, गोधरा और गुजराती गौरव लौटाने को मुद्दा बनाते हैं, वैसे ही सोनिया ने गुजराती गौरव की बात कहकर मोदी मुहिम को महत्व दे दिया है। अब छींटाकशी नारे छीनने पर हो रही है।

जाहिर है इसमें घटिया दर्जे की भाषा इस्तेमाल होगी। लेकिन गुजरात में देश में सबसे पहले सख्त नियम-कायदे लागू करने वाले निर्वाचन आयोग का ध्यान इस ओर बिल्कुल नहीं गया है।

यह अलग बात है कि भाजपा और विहिप मुख्य चुनाव आयु०त जेम्स एम लिंगदोह के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर उतना ही जहर उगल रहे हैं जितना सोनिया गांधी के खिलाफ।

आचार्य धर्मेंद्र तो यहां तक कह रहे हैं कि लिंगदोह किसी मिशनरी में फादर बनकर धर्मांतरण का धंधा ०यों नहीं शुरू कर देते ? इसी भय और संशय के साथ फिलहाल चुनाव नहीं, अहमदाबादियों को 6 दिसंबर शांति से गुजर जाने का इंतजार है।

अरुंधती के बंगले का मामला फिर कोर्ट में

बूकर अवार्ड विजेता अरुंधती राय पचमढ़ी में बने अपने बंगले को लेकर एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई हैं।

यदि सरकारी अमले ने हाईकोर्ट के निर्देशों का पूरा-पूरा पालन किया तो न केवल अरुंधती राय का बंगला, बल्कि प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री श्रवण कुमार पटेल का बंगला भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।

हाईकोर्ट ने पचमढ़ी में निर्माण कार्र्यों पर रोक लगाते हुए वन और राजस्व विभागों के सचिव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, होशंगाबाद के कले०टर और एसपी सहित वन संरक्षक से अवैध निर्माणों की स्थिति के बारे में शपथ-पत्र प्रस्तुत करने को कहा है।

प्रदेश के प्रमुख हिल-स्टेशन पचमढ़ी की सुंदरता नष्टï होने से दुखी रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल डीएस मिश्रा ने जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।

उन्होंने पचमढ़ी के सभी अवैध निर्माण ढहाने और इनकी जांच कराने का आग्रह किया है। श्री मिश्रा ने याचिका में अरुंधती राय के बंगले का जिक्र करते हुए उनके पति प्रदीप कृष्ण को भी प्रतिवादी बनाया है।

याचिका में कहा गया है कि प्रदीप कृष्ण के अलावा कई नामी-गिरामी लोगों ने पचमढ़ी में बिना अनुमति के मकान बना लिए हैं। इससे न केवल पचमढ़ी की प्राकृतिक सुंदरता नष्टï हो रही है बल्कि वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का भी उल्लंघन हो रहा है।

हाईकोर्ट ने श्री मिश्रा की याचिका पर वन और राजस्व विभाग के अधिकारियों से पूछा है कि ०या पचमढ़ी में निर्माण कार्य बिना अनुमति के हुए हैं?

हाईकोर्ट ने आगामी आदेश तक पचमढ़ी और आसपास के क्षेत्र में सभी निर्माण कार्र्यों पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। आदेश के बाद जिला प्रशासन ने पचमढ़ी क्षेत्र में जमीन की खरीद-फरोख्त और निर्माण कार्र्यों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

पचमढ़ी की सुरम्य वादियों में बसने की तमन्ना लेकर जिन बड़े लोगों ने यहां मकान बनवाए हैं, उनमें प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री श्रवण कुमार पटेल का नाम भी शामिल है। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक पचमढ़ी अभ्यारण्य की जमीन पर श्री पटेल ने 1995-96 में मकान बनाया था।

निर्माण कार्य की अनुमति मुख्य वन्य प्राणी संरक्षक, मप्र से लेनी थी, जो प्राप्त नहीं की गई। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के संचालक ने पिछले दिनों श्री पटेल को लिखे एक पत्र में स्पष्टï किया कि उनके द्वारा किया गया निर्माण कार्य विधि मान्य नहीं है। संचालक ने श्री पटेल के उ०त जमीन के पट्टïे का नवीनीकरण करने में भी असमर्थता बताई है।