तेल खुदाई क्षेत्र में निजी निवेश तेजी से बढ़ा

 तेल खुदाई क्षेत्र में निजी निवेश तेजी से बढ़ा

नई तेल खुदाई लाइसेंसिंग नीति (एनइएलपी) की शुरुआत के बाद से तेल खुदाई के क्षेत्र में निजी निवेश बढक़र 15 फीसदी हो गया है।

पिछले एक दशक के दरम्यान तेल खुदाई के क्षेत्र में करीब 4.3 अरब डॉलर का नया निवेश हुआ है। वर्ष 2002 से 2007 के बीच भारत में करीब 20 अरब डॉलर के निवेश का आगमन होना है। इसमें से करीब छह अरब डॉलर का निवेश पहले ही हो चुका है।

नई तेल खुदाई लाइसेंसिंग नीति के चलते समय पूर्व ही इसकी चार चरणों में निविदा निकाली जा चुकी है। इस निविदा प्रक्रिया के तहत निवेशकों को मिले प्रोत्साहन आकर्षक थे।

यही वजह है कि पिछले तीन वर्षों में करीब 70 तेल ब्लाकों के खुदाई लाइसेंस प्रदान कर दिए गए जो पिछले दस सालों में सिर्फ 22 दिए जा सके थे।

सुबीर राहा को ओसेनटेक्स अवार्ड: ओएनजीसी के चेयरमैन सुबीर राहा को भारत में पेट्रोलियम और गैस के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए ओसेनटेक्स के वर्ष 2003-- 04 के मैन ऑफ द ईयर अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

केंद्रीय हाइड्रोकार्बन निदेशालय के मुख्य सलाहकार अविनाश चंद्रा, इंडियन ऑयल के अध्यक्ष एम.एस. रामचंद्रन, एलएनजी पेट्रोनेट के सीईओ सुरेश चंद्र माथुर को एचीवर ऑफ द ईयर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। पुरस्कार महाराष्टï्र के राज्यपाल मोहम्मद फजल द्वारा दिया गया।

एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस साथ आए, तालमेल कर काम करने का ऐलान

मुक्त आकाश नीति अपनाने के बाद एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के राजस्व में हर साल करीब 700 करोड़ रुपए की कमी हो रही है। इसका भरपाई के लिए दोनों विमान कंपनियों ने आपस में तालमेल कर काम करने का ऐलान किया है।

इन दोनों कंपनियों के बीच सहयोग नहीं होने की वजह से उड़ान के दोपक्षीय करार को ये पूरा नहीं कर पाती हैं। इसलिए इन दोनों कंपनियों ने एक साथ मिल कर अपने कारोबारी हितों को पूरा करने का फैसला किया है।

इसके तहत अब इन दोनों कंपनियों की खाड़ी के चार केंद्रों के लिए होने वाली उड़ान में दोनों कंपनियां एक-दूसरे के साथ टिकटों की साझा भी करेंगे।

इसके अलावा इंडियन एयरलाइंस ने मार्च 2004 से चेन्नई और कुआलालंपुर के बीच शुरू होने वाली अबाध उड़ान की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव स्थगित कर दिया है। दोनों कंपनियों ने यह करार किया है कि अब दोनों के टिकटों का इस्तेमाल एक-दूसरे की उड़ान के लिए भी किया जा सकता है।

यानी अगर किसी व्यक्ति के पास दिल्ली से बैंकाक का एयर इंडिया का टिकट है तो वह इंडियन एयरलाइंस की उड़ान से भी बैंकाक जा सकता है। अब इसके लिए पहले से एयरपोर्ट के अधिकारियों को सूचना नहीं देनी होगी।

इसके तहत दिल्ली -मस्कट, कोच्चि -मस्कट, कालीकट-दुबई और कोच्चि-कुवैत की उड़ान के लिए एक-दूसरे की टिकटों का इस्तेमाल करेंगे।

जानकार सूत्रों के मुताबिक एयर इंडिया को कॉमर्शियल और दूसरी विमान सेवाओं के साथ हुए करार के तहत, जिनका इस्तेमाल नहीं हुआ है उन उड़ानो का विनिमय कर 300 करोड़ रुपए की आय होती है। इसके अलावा इंडियन एयरलाइंस का हिस्सा छह करोड़ रुपए का है।

सूत्रों के मुताबिक अगर दोनों विमान सेवाएं एक साथ मिल कर काम करें और दूसरे देशों के साथ करार के तहत जितनी उड़ान की इजाजत है उसका इस्तेमाल करें तो दोनों को मौजूदा आय से कम से कम तीन गुना आय होगी।

हालांकि विमान सेवा के अधिकारियों का मानना है कि उनके रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट है विमानों की कमी। सरकार ने नए विमान खरीदने की योजना बनाई है लेकिन इस योजना का क्रियान्वयन जल्दी होने की संभावना नहीं है।

दोनों कंपनियों के बीच जो करार हुआ है उसका बहुत जल्दी क्रियान्वयन कराया जाएगा। हालांकि इसके क्रियान्वयन की तारीख आधिकारिक रूप से नहीं बताई जा रही है।

लेकिन सूत्रों का कहना है कि दोनों कंपनियों के बीच जीएसए करार की परीक्षा की जा रही दोबारा कमीशन के भुगतान की संभावना को टाला जा सके। इसके बाद ही इसका क्रियान्वयन हो जाएगा।

विदेशी मुद्रा भंडार 106 अरब डॉलर की ऊंचाई पर

देश में विदेशी मुद्रा का सकल भंडार 6 फरवरी को समाप्त सप्ताह में एक अरब 60 करोड 9 लाख डॉलर बढक़र 106 अरब 66 करोड़ 70 लाख डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

30 जनवरी को यह 104 अरब 99 करोड 80 लाख डॉलर और 7 फरवरी 2003 को 74 अरब 66 करोड़ 70 लाख डॉलर के बराबर था।

रिजर्व बैंक द्वारा आज शनिवार को यहां जारी आंकड़ों के अनुसार, सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां एक अरब 53 करोड 50 लाख डॉलर बढक़र 102 अरब 31 करोड़ 50 लाख डॉलर के बराबर हो गई।

30 जनवरी को यह 100 अरब 78 करोड़ डॉलर और पिछले साल आलोच्य सप्ताह में 70 अरब 97 करोड 20 लाख डॉलर थीं।

सप्ताह के दौरान स्वर्ण भंडार पिछले सप्ताह के चार अरब 21 करोड़ 50 लाख डॉलर के मुकाबले 7 करोड़ 40 लाख डॉलर बढक़र 4 अरब 28 करोड़ 90 लाख डॉलर हो गई, जबकि विशेष निकासी अधिकार 30 लाख डॉलर पर टिकी रहीं।

इस मद में 7 फरवरी 2003 को क्रमश: 3 अरब 68 करोड़ 80 लाख डॉलर और 70 लाख डॉलर के बराबर राशि थी।

रिजर्व बैंक का केन्द्र सरकार पर ऋण एवं अग्रिम शून्य: पिछले कई सप्ताह की भांति रिजर्व बैंक का केन्द्र पर ऋण एवं अग्रिम छह फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह में भी शून्य बना रहा।

रिजर्व बैंक के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार इस दौरान राज्य सरकारों को ऋण एवं अग्रिम एक सप्ताह पहले के 41 अरब 22 करोड़ रुपए से गिरकर 38 अरब 45 करोड़ रुपए रह गया।