भारतीय इस्पात को अमेरिका में एंटी-डंपिंग शुल्क भुगतना होगा

 

भारतीय इस्पात को अमेरिका में एंटी-डंपिंग शुल्क भुगतना होगा

भारत से इस्पात के कुछ उत्पादों के निर्यातों को अमेरिका में एंटी-डंपिंग शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है। वाणिज्य मंत्रालय को पता चला है कि भारत तथा एशिया, यूरोप एवं लातिन अमेरिका के 18 अन्य देशों ने अमेरिकी बाजार में इस्पात के कुछ उत्पादों की डंपिंग की है।

वाणिज्य मंत्रालय ने अपने आरंभिक निर्धारण में कहा है कि भारत की इस्पात इंडस्ट्रीज लिमिटेड तथा अन्य कंपनियों द्वारा किए गए निर्यात की डंपिंग मार्जिन 153.65 प्रतिशत तक पहुंच गई है और इसलिए इन निर्यातों को एंटी-डंपिंग शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है। अमेरिका में एंटी-डंपिंग शुल्क लागू करने के लिए वाणिज्य विभाग का अंतिम एवं सकारात्मक निर्धारण आवश्यक है।

वाणिज्य विभाग को अपने निर्धारण में खुलासा करना पड़ता है कि किसी उत्पाद की डपिंग हुई है और इस डंपिंग से अमेरिकी उद्योग को नुकसान हुआ है या इससे खतरा बढ़ा है। वाणिज्य विभाग यदि अपने अंतिम निर्धारण में खुलासा करता है कि भारतीय कंपनियों ने इस्पात के कुछ उत्पादों की डंपिंग की है तो इस उत्पाद के लिए एंडी-डंपिंग शुल्क वसूला जाता है। वाणिज्य विभाग इस सिलसिले में 10 जून तक अपना अंतिम निर्धारण करेगा।

एसोचैम ने श्रम आयोग की सिफारिशों का विरोध किया

उद्योग मंडल एसोचैम ने 20 या उससे अधिक कर्मचारी रखने वाले प्रतिष्ठïानों के लिए नया कानून लागू करने संबंधी राष्टï्रीय श्रम आयोग की सिफारिशों का विरोध किया है।

एसोचैम का कहना है इन सुझावों के व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं और इसकी चपेट में वे छोटे उद्योग भी आ जाएंगे जो कम संख्या में श्रमिक रखते हैं पर उनकी संख्या 20 से थोड़ी बहुत ज्यादा रहती है। एसोचैम का कहना है प्रतिष्ठïान की परिभाषा में बड़ी संख्या में तमाम प्रकार के संगठन आ जाएंगे।

बायो डीजल से चलेंगे रेल इंजन

भविष्य में रेल इंजन पेड़ की प७िायों से तैयार बायो डीजल से चलेंगे। रेल मंत्रालय ने आज पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ बायो डीजल के उत्पादन के लिए एक प्रमुख परियोजना संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इसके तहत ‘रतन ज्योत’ तथा एक अन्य पौधे से डीजल तैयार किया जाएगा।

रेल मंत्री नीतिश कुमार, पेट्रोलियम मंत्री राम नाईक तथा ग्रामीण विकास राज्यमंत्री अन्ना साहिब विखे पाटिल की मौजूदगी में हुए समझौते के प्रारंभिक चरण में इंडियन आयल कॉरपोरेशन, रेलवे की 500 एकड़ जमीन पर ‘रतन ज्योत’ की खेती करेगा, जिससे दो तीन वर्षों में 500-800 मीट्रिक टन बायो डीजल के उत्पादन की उम्मीद है।

रेलवे इस वनस्पति डीजल का लखनऊ स्थित अपनी अनुसंधान प्रयोगशाला में परीक्षण कर चुका है और पिछले साल 31 जनवरी को नई दिल्ली शता३दी ए०सप्रेस का इंजन इससे सफलतापूर्वक चलाया जा चुका है।

इस मौके पर रेल मंत्री ने कहा कि इससे न केवल रेलवे को सस्ता ईंधन मिलेगा, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी अच्छा होगा और इसकी ख्ेाती से काफी लोगों को रोजगार मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि रेल पटरियों के पास खाली पड़ी लाखों एकड़ जमीन के अलावा बंजर जमीन पर ‘रतन ज्योत’ को उगाया जा सकता है।

इस तरह पानी नहीं होने पर भी इसे मरु भूमि में भी उगाया जा सकता है। अमेरिका समेत कई देशों में रेल इंजनों में बायो डीजल सफलता से इस्तेमाल किया जा रहा है।

शुरुआती अनुमान के अनुसार, इस ईंधन की कीमत 11-12 रु. प्रति लीटर होगी जो रेलवे के परंपरागत ईंधन डीजल से कम है। रेलवे को हर साल 20 लाख टन डीजल की जरूरत होती है।

नाईक ने कहा कि बाद में इसे सडक़ पर चलने वाले वाहनों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है ०योंकि यह सीएनजी तथा एलपीजी से भी सस्ता पड़ता है। एजेंसी

आईएसडी कॉल्स पर एयरटाइम शुल्क फ्री किया एयरटेल ने

सेल्यूलर मोबाइल बाजार में ज्यादा मजबूती से पैर जमाने की मुहिम जारी रखते हुए एयरटेल ने आज बुधवार को प्रीपेड और पोस्टपेड खंड के अपने ग्राहकों के लिए अंतरराष्टï्रीय कॉल पर एयरटाइम शुल्क माफ करने तथा एसटीडी कॉल पर एयरटाइम दर घटाकर 50 पैसे प्रति मिनट करने की घोषणा की।

एयरटेल ने कहा कि यह कटौती मोबाइल से मोबाइल कॉल पर तत्काल प्रभाव से लागू होगी। एसटीडी कॉल पर एयरटाइम शुल्क में कटौती 79 फीसदी और आईएसडी कॉल के लिए सौ फीसदी होगी।

एयरटेल ने पोस्टपेड खंड में अपने ग्राहकों के लिए मोबाइल से मोबाइल एसटीडी सुविधा बिना अग्रिम जमा लिए खोलने की घोषणा भी की जो सभी नए ग्राहकों को तत्काल तथा मौजूदा ग्राहकों को चरणबद्ध ढंग से मिलेगी।

नोएडा, सूरत के विशेष आर्थिक जोन को विदेशी जोन का दर्जा

अब देश में बने उत्पादों पर भी सीमा शुल्क लगाया जाएगा। ये उत्पाद वे होंगे जो देश में स्थित विशेष आर्थिक जोन में निर्मित किए जा रहे हैं। अगले 15 अगस्त से चीन क ी तर्ज पर केन्द्र सरकार भारत में भी इस व्यवस्था को लागू करने जा रही है।

केन्द्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क विभाग के अनुसार नयी व्यवस्था के तहत देश के जो विशेष आर्थिक क्षेत्र हैं उन्हें कर व शुल्क के हिसाब से अब उन्हें विदेशी जोन का दर्जा दिया जाएगा।

इस तरह देश में नोएडा, कांडला, सूरत, सांताक्रूज, कोच्चि, चेन्नई, विशाखापट्टïनम और पं बंगाल स्थित फाल्टा के विशेष आर्थिक जोन में 15 अगस्त से नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। पहले निर्यात जोन स्थित प्लांट घरेलू मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की श्रेणाी में माने जाते थे।

नई व्यवस्था के अनुसार देश के घरेलू आर्थिक प्रक्षेत्र से विशेष आर्थिक क्षेत्रों में किसी सामान की सप्लाई की जाती है उसे निर्यात की श्रेणी में और यदि विशेष आर्थिक जोन से किसी निर्मित उत्पाद की घरेलू आर्थिक प्रक्षेत्र में सप्लाई की जाती है वह आयात की श्रेणी में माना जाएगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र से होने वाला व्यापारिक कारोबार केन्द्रीय उत्पाद कानून, 1944 द्वारा संचालित न होकर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क कानून, 1962 के जरिये संचालित होगा।

नई व्यवस्था के मुताबिक अब घरेलू आर्थिक क्षेत्र से जो भी उत्पाद विशेष आर्थिक क्षेत्रों को आपूर्ति किए जाएंगे वे निर्यात की श्रेणी में रखे जाने की वजह से इन्हे भी ड्यूटी ड्रा बैक और ड्यूटी एक्जेम्पशन पासबुक बेनीफीट (डीईपीबी) की सुविधा प्राप्त होगी।

पिछली 30 जुलाई को जारी सक्र्युलर के मुताबिक सीमा शुल्क के मुख्य आयुक्तों को इस बात के स्पष्टï निर्देश दिये गए हैं कि वह नयी व्यवस्था के तहत विशेष आर्थिक प्रक्षेत्रों को डंपिंग ग्राउंड बनाने की कोशिश यदि कोई करें तो उस पर चौकसी बरते अन्यथा लोग इस बहाने विशेष आर्थिक प्रक्षेत्रों में बेचे जाने वाले उत्पादों क े मूल्य को बढ़ा चढ़ा कर ज्यादा से ज्यादा डयूटी ड्राबैक करने की कोशिश करेंगे।

नई व्यवस्था के मुताबिक घरेल्ूा आर्थिक प्रक्षेत्र से विशेष आर्थिक प्रक्षेत्रों को आपूरित किये जाने वाले सामान को तत्काल बिना उत्पाद शुल्क दिये बेचने की छूट होगी।

इसी तरह विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों की निजी जरूरत की चीजों को बिना सीमा शुल्क चुकाए प्रवेश नहीं दिया जा सकता है। साथ ही विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र में कार्यरत कोई उत्पादन इकाई अपना सारा माल विदेश के बजाए घरेलू बाजार में चाहे तो बेच सकती है।